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एपस्टीन फाइल्स पर सियासी संग्राम: कांग्रेस ने हरदीप सिंह पुरी से पूछे तीखे सवाल, पुराने ईमेल को लेकर बढ़ा विवाद

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नई दिल्ली: अमेरिकी कारोबारी और यौन अपराध मामलों के आरोपी रहे जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद भारत की राजनीति में भी इस मुद्दे ने हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को निशाने पर लेते हुए उनके कथित पुराने संपर्कों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सार्वजनिक रूप से कई सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुरी एपस्टीन के साथ अपने संबंधों की गंभीरता को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद उस समय तेज हुआ जब हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान का जवाब देते हुए कहा था कि वह लगभग आठ वर्षों के दौरान पेशेवर कारणों से एपस्टीन से “तीन-चार बार” मिले थे और उनसे जुड़ी जानकारियां पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं। इसके बाद कांग्रेस ने अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए 2014 के कथित ईमेल संवाद का मुद्दा उठाया। खेड़ा ने दावा किया कि उन दस्तावेजों में एक ईमेल आदान-प्रदान का उल्लेख है, जिसमें एपस्टीन और पुरी के बीच सिलिकॉन वैली के उद्यमी रीड हॉफमैन से मुलाकात को लेकर बातचीत हुई थी। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि यदि संबंध महज औपचारिक थे, तो एपस्टीन को प्रस्तावित मुलाकात की जानकारी पहले से कैसे थी और वह इस स्तर पर सलाह क्यों दे रहा था। उन्होंने यह भी पूछा कि पुरी ने उसे “दोस्त” क्यों कहा और किस प्रकार की सहायता या समन्वय की भूमिका एपस्टीन निभा रहा था। कांग्रेस का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि कथित संवाद केवल औपचारिक परिचय से आगे का था, जबकि भाजपा और सरकार की ओर से इस पूरे मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताया जा रहा है। इस बीच “एपस्टीन फाइल्स” को लेकर वैश्विक स्तर पर भी चर्चा तेज है। अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल के महीनों में उससे संबंधित लाखों पृष्ठों के दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं, जिनमें कथित तौर पर प्रभावशाली व्यक्तियों, कारोबारी जगत और राजनीतिक संपर्कों से जुड़े उल्लेख शामिल हैं। इन फाइलों में बड़ी मात्रा में डिजिटल रिकॉर्ड, चित्र और वीडियो सामग्री भी शामिल बताई जा रही है। हालांकि इन दस्तावेजों में नाम आने का अर्थ किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होना नहीं माना जाता, बल्कि यह केवल संपर्क, संवाद या संदर्भ का संकेत होता है। फिलहाल इस मुद्दे पर देश में राजनीतिक बयानबाजी तेज है और कांग्रेस सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की “राजनीतिक रणनीति” करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद और राजनीतिक बहसों का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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